छत्तीसगढ़

शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अगली तारीख 15 सितंबर

Shantanu Roy
8 Sept 2025 9:10 PM IST
शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अगली तारीख 15 सितंबर
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की याचिका पर आज (सोमवार) हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 15 सितंबर 2025 तय कर दी है। इस दिन ईडी से अपेक्षा की जा रही है कि वह अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज और चालान पेश करेगी।
याचिका में क्या कहा गया है?
चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को असंवैधानिक बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। चैतन्य ने कहा है कि उनकी हिरासत कानून के खिलाफ है और उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी याचिका खारिज हो चुकी है, जहाँ अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया था। इसके बाद चैतन्य ने हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की।
पिछली सुनवाई और न्यायिक रिमांड
बीते 2 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसमें ईडी ने अपना पक्ष रखा। आज की सुनवाई में भी ईडी ने दस्तावेज और तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने सुनवाई के बाद चैतन्य बघेल को 15 सितंबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। वहीं, राजधानी रायपुर में विशेष कोर्ट में शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई थी। कोर्ट ने उस सुनवाई में भी उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा था। चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को ईडी ने भिलाई से गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि शराब घोटाले की रकम में उन्हें 16.70 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी मिली थी। तब से वह जेल में बंद हैं और अब मामले की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
ईडी की अगली कार्रवाई पर निगाहें
15 सितंबर को अदालत में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि ईडी इस दिन अपना चालान दाखिल कर सकती है, जिसमें आरोपों से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेन-देन और अन्य सबूत शामिल होंगे। अदालत इस आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि मामले में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पहले ही जुटाए जा चुके हैं और आर्थिक लेन-देन के ठोस सबूत हाथ लगे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने करोड़ों की राशि का लेन-देन आपसी नेटवर्क के जरिए किया।
शराब घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले से जुड़ा है। ईडी ने इसमें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आबकारी नीति में गड़बड़ी कर शराब व्यापार से भारी रकम इकट्ठा की गई। जांच में यह पाया गया कि इस अवैध नेटवर्क में वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। ईडी की जांच में यह सामने आया है कि IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी, और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर शराब घोटाले को अंजाम दिया। कई लेन-देन फर्जी कंपनियों के नाम पर कराए गए और घोटाले की रकम को वैध कारोबार के जरिए सफेद करने का प्रयास किया गया। इस घोटाले में राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक
मिलीभगत
की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी अब तक कई बैंक खातों की जानकारी जुटा चुकी है, जिससे धनशोधन का पूरा नेटवर्क उजागर होने की संभावना है। चैतन्य बघेल की याचिका और ईडी की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। अदालत के फैसले पर न केवल चैतन्य की स्थिति निर्भर करेगी, बल्कि पूरे शराब घोटाले की दिशा भी इससे प्रभावित होगी। राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है और इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ईडी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और चालान पर सबकी निगाहें हैं। अदालत का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।
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